अपने पर्यावरण को लेकर ,उसमे रहने वाले जीव जंतुओं को लेकर हम सब कितने जागरूक है। इस बात का अनुभव तब होता है जब अपनी आंखों से उनके प्रति दया-भाव या क्रूरता का दृश्य देखने को मिलता है।
एक निजी अनुभव आप सब के साथ शेयर कर रही हूं-
आज से तीन या चार दिन पहले यूँ ही प्रकृति की गोद में जाने का मन हुआ। इस बात के लिए सौभाग्यशाली हूँ कि जहां रहती हूं वह शहर प्रकृति की कृपा दृष्टि में है।
भोपाल जितना खूबसूरत अपनी झीलों के लिए है उतना ही प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी । ऐसी ही खूबसूरत मंज़र को देखने हम निकल पड़े। सुनसान सड़कें दोनों तरफ से घने पेड़ो से घिरी हुई या यूं कहूँ जंगलों के बीच में मानव निर्मित सड़के । एक मनचली प्रेमिका की तरह लग रही थी जो सुंदर , चंचल और यौवन से भरी हुई हो।
उस पर बीच में खेतों की हरियाली, ऊँची पहाड़ी, बीच-बीच में बहता नदी का पानी।
इतने सुंदर मंज़र में डूबे हम दोनों बस रास्ते का आनंद ले रहे थे। तभी अचानक से देखते है कि बीच सड़क पर एक कार का दरवाज़ा खुला पड़ा है और उस दरवाज़े की ओर बहुत से बंदर आ / जा रहे है। चूँकि सड़क चलायमान थी मतलब भीड़ न सही फिर भी गाड़ियां सड़क पर भाग रही थी ऐसे में एक बुद्धिमान इंसान का सड़क के मध्य गाड़ी रोक कर बंदरो को खाना देना कितनी बुद्धिमानी का सबक है। जनाब ख़ुद को लेकर कितने सज़ग थे नहीं पता परन्तु जंगल में रहने वाले बंदरों की उन्हें ज़रा भी फिक्र नही थी तभी बीच सड़क पर उन्हें खाना फेक कर दे रहे थे । जिससे मुसाफिरों को तो आने जाने में परेशानी हो ही रही थी सबसे बड़ी परेशानी बंदरों की जान का ख़तरा थी कब कौन गाड़ी अपना संतुलन खो दे और उन्हें टक्कर मार दे।
शायद इस सोच से अनभिज्ञ बुद्धिमान मानव न सिर्फ उनकी जान तो खतरे में डाल ही रहा था बल्कि उन लोगों की भी जो वहां से गुजर रहे थे।
वहां से गुजरते हुए जब हमने उस पर चिल्लाया कि -
"क्या कर रहे हो अंकल ?"
तब जाकर उन्होंने वहां से जाना ठीक समझा।
मेरा बस यही अनुरोध है कि ऐसे काम न करें । जितना हक़ आपको है इस दुनिया में अपनी पूरी उम्र जीने का; उतना ही इन जीव जंतुओं का भी है । मानव जाति अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दे ।
कभी सोचा है जैसा व्यवहार हम इन जीव जंतुओं और पशु पक्षियों के साथ करते है।
वही व्यवहार कभी वो हमारे साथ करने लगे फिर - क्या करेंगे आप?
ये पर्यावरण हम सब से मिलकर बना है इसके संतुलन के लिए जितनी जरूरत इंसान की है उतनी ही जीव जंतुओं और पशु पक्षियों की नदी, तालाबों की है।
कृपया इनके साथ मानवीय व्यवहार अपनाए।
Priyankakhare
मीरांत
13 sep 2022
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