Friday, May 21, 2021

चुटकुले

अजीब दुविधा है भाई जी
ज़रा समझाइए तो
ऑनलाइन का मतलब
ऑनलाइन ही होता है या 
"Availabe for line"
काहे messanger बाबू को बताना था तनिक🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄~ मीरान्त

Friday, May 14, 2021

ख़ुदा और इंसानियत

आसमान में बैठा वो परेशान था
धरती पर होती इबादतों से
जहाँ दीप था होम था कपूर था लोहान था
माथा टेकने को लाखों का जमावड़ा था
बड़े बड़े भव्य स्थान था उसके लिए
नाम जिन्हें मंदिर मस्जिद दिए गए
फिर भी वो खुश नही हो रहा था
उसके फ़रिश्ते भी बैचैन थे
आख़िर हुआ क्या है?

तभी ख़ुदा के चेहरे पर गिरती 
आँसू की एक बूंद ने कहा
जब उसे पूजने वाला इंसान
उसकी इबादत में डूबा इंसान
उसे याद रखता इंसान
 उसके लिए लड़ता इंसान
अपने ही जैसे इंसानों को काटता इंसान
अपनों को मारता इंसान
ख़ुद में इतराता इंसान
गलती करने भी न पछताता इंसान
धर्म को बचाने की चाहत में इंसान
अंदर बसी उस ईश्वर की दी
इंसानियत को मार जाता इंसान
इंसान होकर दानव रूप में आता इंसान
इंसानियत भूल जाता है

तब ऊपर बैठा वो धर्म के पुजारियों 
का देवता भी खून के आँसू बहाता है
उसने मानव को बनाया था मन से
धरती को खूबसूरत बनाने की चाहत में।

उस ख़ुदा ने अपने बंदे को जो सिखाया
आज उसको धर्म की आड़ में
झूठ की आन में ,अपने स्वार्थ के जाल में
जो कर्म उसने शुरू किये
ख़ुदा उससे बस रो पड़ा
अपनी ही मूरत को देख हार चुका
रोते बिलखते लोगों की पुकार से
इतना भर गया 
अपनी ख़ुदाई पर शर्म से मर गया।~ मीरान्त

Sunday, May 9, 2021

अम्मी कहती है

अम्मी कहती थी हारना नहीं तुझे
लाडली है मेरी लड़ना होगा तुझे
चाहे जैसी भी परिस्थितियां आये
चाहे जैसे सवाल आये
हर सवाल का उत्तर है यहां
बस जरा सा हिम्मत रख
उस ताले की भी चाबी है
बस गुच्छे  पर सही नज़र रख
क्यों टूटना क्यों बिखरना
जब संभलना भी खुद है तुझे
देख उस बादल को
टिमटिमाता है जो तारों से
हर तारा चमकदार है
बस एक तारा जो हार गया
गिर जाता है उस गगन अपार
फिर भी न चमक है रुकती
इस आसमान की
टूटना नही है किस्मत तेरी
थोड़ा सा साहस और
 होगी दुनियां तेरी।~मीरान्त

Friday, May 7, 2021

शायरी

वक़्त की रूह में ताकत बहुत होती है
तभी टूटी हुई कश्ती भी समुंदर में किनारा
ढूढ़ ही लेती है।~मीरान्त

Thursday, May 6, 2021

कविता

झूठ की कश्ती पर बैठा वो मुसाफ़िर
जाने कहाँ जाने को तैयार है
झूठा रास्ता है जिसका 
उसकी मंजिले भी बेकार है
डोर भी थाम रखी है उसने
काटों से भरी है 
फिर भी कहता है मुस्कुरा कर
जिंदगी मेरी फूलों सी गुलज़ार है
न समझ,
अभी रेगिस्तान की मरीचिका
में है शायद
तभी बंजर ज़मीन  पर भी 
हरियाली दिखती जिसे बेशुमार है~मीरान्त

Saturday, April 10, 2021

सीख

मासूमियत के साथ काम वही कर सकता है जो अपने काम से प्रेम करता हो। बिना ये सोचे कि काम में सफलता है या मेरा काम किसी को पसंद आएगा या नही । बस मुझे ये करना है क्योंकी इसमे मेरी आत्मा बस्ती है। हम सब के सामने ऐसे कई लोग आते है, उनके काम आते है पर अपने अहंकार में या खुद को कम आँकने के सफर में हम अक्सर उन लोगों से उनके कामों से बहुत कुछ सीखना भूल जाते है।
ऐसे ही एक छोटी सी बच्ची ने अपनी मासूमियत से ये मुझे सिखा दिया जिसे सीखना इस वक़्त मेरे लिए बहुत जरूरी था। 
जिंदगी के इस मोड़ पर जब ख़ुद को हारा हुआ तो नहीं पर सबसे कम जरूर आँकना मैंने शुरू कर दिया था। उस वक़्त ये सीख मुझे जीवन को एक नए तरह से जीने में मदद जरूर करेगी।
फ्लोरिना उम्र में 6 से 10 साल तक की बच्ची सुपर डांसर चैप्टर 4 में आयी और सुपर 12 में सेलेक्ट भी हो गयी। जब जजेस द्वारा उसे चुना गया और मैडल और सर्टिफिकेट दिया गया तब उससे पूछा गया कि आप जानते हो आपके साथ क्या हुआ? आपको दिए इस मैडल और सर्टिफिकेएक मतलब क्या है?
जबाब सिर्फ यही मैंने डांस अच्छा किया इसलिए। क्योंकि उसकी कोई ख़ुद से या कार्यक्रम में चुनने को लेकर थी ही नहीं। उसे तो बस डांस करना था और अपना सौ प्रतिशत देना था।
वही बात म्यूजिक लेजेंडरी ए आर रहमान जी ने भी इंडियन आईडल के कार्यक्रम के दौरान कही कि जब उन्हें ऑस्कर के लिए चुना गया तब उन्हें चिंता इस बात की नहीं थी कि उन्हें ऑस्कर मिलेगा या नहीं बल्कि इस बात की थी कि वे सुर में गा पाएंगें या नहीं।

इन बातों से जाना कि जब हम अपने काम को व्यवसाय में बदल देते है तब उसकी आत्मा को मार देतेहै हमारा कर्तव्य सिर्फ अपने आपको और आपके कौशल को निखारना है न कि आगे बढ़ने की दौड़ में भागना।

जब आप सिर्फ अपने काम से प्यार करते है आपको सिर्फ वही करना है बिना किसी बात की चिंता के तब वह काम आपके लिए हार ,जीत, सम्मान ,अपमान और भी भावनायों से ऊपर उठ जाता है । वह काम सिर्फ आपको ख़ुशी और सुकून देने लगता है।

मुझे लिखना पसंद है पढ़ना पसंद है पर इन सब को मैं हमेशा एक स्ट्रेस के तौर पर लेती हूँ। जबकि इन कामों में मुझे सुकून मिलता है लिखते वक्त हमेशा दिमाग मे आता है मेरा लिखा पसंद आएगा या नहीं?

पर अब सोच ही बदल गयी। अब बस जो मुझे पसंद है वो करना है क्यों कर रही हूँ ये अब मेरे लिए मायने नही रखता। और आपके लिए भी नहीं रखना चाहिए।

बस आप अपना सौ प्रतिशत दीजिये ,पर भार समझ कर नहीं उससे प्यार करके । परिणाम से ज्यादा आपको करने में मज़ा आयेगा।
 मीरांत

Tuesday, March 30, 2021

कविता

बड़ी ही अजीब होती है ख़यालों की दुनियां
वास्तविकता से परे तो आभाषी में भी जीवंत सी
लाखों ख्वाहिशों में लिपटी सी
मन मे अलग उथलपुथल रख दे
बिना बात धकड़नों  के तीव्र वेग सी
आधारों से मुक्त, स्वच्छन्द सी
भटकता मन जब भी मुक्त होकर
निकलन पड़ता है दूर इससे कहीं
उलछनों और मेहनत की इस चार दिवारी में
मानों सुंदर किसी सपनें से दूर होकर
बैठा हो कोई धधकते उस ज्वालामुखी पर
असलियत मानों जहां सामने हो और उड़ने की चाह में
आग में लिपटे उन पंखों को दर्द में भी फड़फड़ाना है
जानते हो जैसे वे पंख जितने ऊपर आसमानों को
छूने को बेचैन होंगे ,उतना आसान होगा फैले उस समुन्दर को
पार पाना ,
डर से भरा मन भी जब ऊंचाइयों से दोस्ती कर लेता है
अटूट संघर्ष को जी कर फिर मिलता है जो उसे जो पाना है~मीरान्त

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...