Wednesday, October 4, 2017

रचना और रचनाकार

रचनाकार ने कहा अपनी रचना से
         
है रचित मेरी रचना
तुझमे सब रस मैंने डाल दिया।

अब प्रतीक्षा है मुझको
तुझे किसने कितना भाव दिया।

तत्काल बोल पढ़ी रचना,
मैं तो रचित तेरे द्वारा,

अनभिज्ञ हूँ, मैं खुदसे
शब्द ताल सब है ,तेरे
मैं तो रची हूँ तुझसे,

पसंद करेगा जो मुझको,
वो गुणगान तेरा ही गायेगा,

मैं तो ,वो माला
जिसके मोती को स्वरूप
तुमसे ही आएगा।

भविष्य में भी, पहचान तुम्हे
मुझसे ही जाना जायेगा।

सुन रचित ,अपनी रचना को,
रचनाकार ने प्रणाम किया,
क्षमा करो, मेरी भूल,
जो मैंने तुम पर उपहास किया।
                   ~प्रियंका~" श्री "

6 comments:

  1. बहुत बहुत धन्यवाद पुरुषोत्तम जी।

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  2. अद्भुत काव्य सरल सरस।
    बहुत सुंदर धाराप्रवाहता अंत तक लय मे बंधी।
    बधाई।

    रचेता पुछे रचना से कौन श्रेष्ठ...

    कोई किसी से कम नही
    बस एक दूजे के पूरक हैं
    बिन सुहागे चमक सोने की फीकी है
    कभी कभी कुछ रचनाऐं
    जन जन चित चढ़ जाती है
    और रचनाकार गौण हो जाता है
    इसलिये अपनी कृति संतान सी होती
    देख उसकी तरक्की
    जन्म दाता फूला न समाता है।

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  3. बहुत बहुत आभार कुसुम जी

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  4. धन्यवाद विश्वा जी।

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