हम बाशिन्दे है इश्क़ के ,
इश्क ही अपना मजहब
इश्क़ ही, है खुदा ,
और यही खुदा की इबादत
इश्क़ करो इस जग में
जो दिल से तुम्हे अपनाए
सबसे पहला इश्क़ तो
मां के अधिकार ही आये
गर है सच्चा इश्क़ तो,
ह्रदय मे ईश्वर समाए
इश्क़ की मीठी खुशबू से,ये
खुद भी अछूता न रह जाये।
जैसे सबरी ने राम को ,
भक्ति सागर में डूब के
झूठे बेर खिलाएं
प्रेम भक्ति में मीरा भी,
विष प्याला पी जाएं
राधा ने तो प्रेम के
ऐसे दीप जलाये
श्याम भी देखो अब
राधे श्याम कहलाये
जो इससे अनभिज्ञ रहे ,
जग सार वो समझ न पाए
जैसे बिन पानी के ,
प्यासा जीवन अतृप्त रही जाएं
इश्क़ से बढ़कर कुछ नही
जो बात ये समझ जाएं
काहे का कोई पाप हो
सब जग शांति समाये।।
~प्रियंका "श्री"~
26/9/17
Wednesday, October 4, 2017
इश्क़
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