भावनाएं
क्या कुसूर था मेरा
क्यों मुझे यू ठुकरा दिया
न समझा इंसान मुझे
मोल भाव बस्तु बना दिया
जब चाह थी ही न मुझसे तो
क्यों अपने घर बुला लिया
बोल ही देते तुम सेवक इस घर की
बहू बना बस बिदा किया
सवालो का क्यों
अधिकार नही मुझको
बिन तीली लिए
हर शब्दो नेे जला दिया
हर रिश्ते को बनाने में
खामोशी से हर गम भुला दिया
हर कोशिश हुई नाकाम
जो अपनो ने यू दगा दिया
भरोसा था खुद पर
तुम्हे तो मैने अपना बना लिया
टूट गयी उस वक़्त
थम गया अस्तित्व मेरा
जिसे दिल दिया
उसने तलाक थमा दिया
क्यों दिया उस मन को घात
जिसने परमेश्वर मान दिया।
~प्रियंका~"श्री"
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ReplyDeleteधन्यवाद पुरूषोत्तम जी । माफ कीजियेगा गलती से आपका कमेंट रिमूव हो गया ।क्षमा कीजियेगा।
Deleteधन्यवाद पुरूषोत्तम जी । माफ कीजियेगा गलती से आपका कमेंट रिमूव हो गया ।क्षमा कीजियेगा।
Deleteअरेंज्ड मैरेज ( माता पिता द्वारा तय किया गया विवाह) के दर्द को बखूबी बयां किया है.
ReplyDeleteधन्यवाद राकेश जी।
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