ज्ञान
ज्ञान पहला लीजिये, मां की सीख सिखाये
दूजा पितृ से लीजिये, जो जीवन त्रुटि सुधाये।
तृतीय ज्ञान मिले गुरु से, जो समाज सम्मान बढ़ाये
जब तक जीवन जिये रे मुसाफिर, ज्ञान की राह दिखाये।
ज्ञान की ज्योत ज्यूँ जले,कुबुद्धि सुबुद्धि बन जाये
ज्ञान बिना एक राजा ,स्वत: नष्ट हो जाये।
प्रभु दिया ये परम आशीष , जो भी नर अपनाए
बल पाए वो बुद्धि का, दो घड़िया अन्न कमाए।
सीख यही मैं दीजिये, आधा ज्ञान न कभी पाए
पूरा ज्ञान ही लीजिए, जो भरपूर लाभ दिलाये।
संग ज्ञान अहम न आये,ये बात जो समझ जाएं
न हो कोई वाद विवाद, न घर परिवार टूटी जाए।
~प्रियंका"श्री"
13/10/17
Bahut sunder aur sarthak rachna
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