Tuesday, February 20, 2018

तन्हाई

कैसी ये उदासी छाई है
कैसी ये मायूसी आई है
अपनों के बीच हूँ फिर भी
मन में क्यूँ तन्हाई है।

तन्हाई,ये वो तन्हाई नहीं
ये सोच का आभास है
जो दिमाग से लेकर जन्म
दिल में आबाद है।

इस आबादी का आलम
कुछ यूँ छाया है
न घर मे है सुक़ून
न बाहर चैन पाया है।

चैनों सुक़ून पाने को
हम कुछ यूँ भटके है
लोगों के बीच जो न मिला हमें
उसे कब्रिस्तान में हमनें पाया है।
                ~प्रियंका"श्री"
                   20/2/18

10 comments:

  1. Replies
    1. वो तो होगी दिल मे दर्द ये तन्हाई जो छाई थी

      Delete
  2. जिसको चाहते दिल से उससे ना
    मिलना ही तन्हाई होता है
    शरीर अपनो के बीच होता है
    मन उसी तन्हाई मे होता है

    ReplyDelete
  3. निराशा मेपलायन या फिर आध्यात्म की राह।
    सार्थक भाव रचनार।
    ससुंद ।

    ReplyDelete
  4. साधुवाद
    सलाम पहुंचे

    ReplyDelete

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...