उजड़ा हुया था कुछ अंदर मेरे
लाख कोशिशों के भी
जब समझ न आया।
पिछले वक़्त ने तब दस्तक दी
मेरे दिलों दिमाग पर ,
तब बंजर हो चुके रिश्ते की
उजड़ी ज़मीन का ख्याल आया।
जिसे वक़्त-दर-वक़्त सींचने की कोशिश में हमनें, अपना सबकुछ था ,दाव पर लगाया।
ये उसी तकलीफ का एहसास है,
जो मैंने अपने अंदर ,कुछ उजड़ा हुया है पाया।
प्रियंका "श्री"
27/3/18
वाह बहुत सुन्दर गहरे उतरते भाव
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत अशआर
ReplyDeleteआभार दी
ReplyDeleteआभार लोकेश जी
ReplyDeleteजुदाई तकलीफ़ देती है ...
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