Wednesday, May 9, 2018

शायरी

टूट कर बिखरना आता है मुझे,
बस ! तलाश है उसकी,
जो बिखरी हुई मेरी कतरनों को 
फिर सवार दे।
                          प्रियंका"श्री"
                          9/5/18

9 comments:

  1. बहुत खूब प्रियांक "श्री" जी...👌

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  2. बहुत खूब लिखा आपने आदरणीया

    सँवार दूँ तेरी उलझी लटों को झट से,ऐ !जिंदगी,
    उलझन तो यह है कि हम ना उलझ जायें कहीं : उत्कर्ष

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  3. आभार पुरुषोत्तम जी

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कविता

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