टूट कर बिखरना आता है मुझे,
बस ! तलाश है उसकी,
बस ! तलाश है उसकी,
जो बिखरी हुई मेरी कतरनों को
फिर सवार दे।
प्रियंका"श्री"
9/5/18
प्रियंका"श्री"
9/5/18
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...
बहुत खूब प्रियांक "श्री" जी...👌
ReplyDeleteबहुत बढिया
ReplyDeleteवाह सुंदर ।
ReplyDeleteबहुत खूब लिखा आपने आदरणीया
ReplyDeleteसँवार दूँ तेरी उलझी लटों को झट से,ऐ !जिंदगी,
उलझन तो यह है कि हम ना उलझ जायें कहीं : उत्कर्ष
आभार पुरुषोत्तम जी
ReplyDeleteआभार दी
ReplyDeleteआभार सुधा जी
ReplyDeleteआभार नवीन जी
ReplyDeleteआभार टीम बुक
ReplyDelete