अक्सर, लिखकर छोड़ देती हूँ नाम उसका कागज के एक टुकड़े पे इस ख्याल से कि शायद वो मेरी खामोशियों को पढ़ ले..... प्रियंका श्री 19/5/18
वाहःबेहतरीन
ख़ामोशियों की ज़ुबान बस प्रेम पढ़ सकता है ...अच्छा ख़याल ...
सुन्दर प्रस्तुति !आज आपके ब्लॉग पर आकर काफी अच्छा लगा अप्पकी रचनाओ को पढ़कर , और एक अच्छे ब्लॉग फॉलो करने का अवसर मिला !
मोहब्बत तो मरता नही काश तेरे एहसास में मै जिंदा होता...
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...
वाहः
ReplyDeleteबेहतरीन
ख़ामोशियों की ज़ुबान बस प्रेम पढ़ सकता है ...
ReplyDeleteअच्छा ख़याल ...
सुन्दर प्रस्तुति !
ReplyDeleteआज आपके ब्लॉग पर आकर काफी अच्छा लगा अप्पकी रचनाओ को पढ़कर , और एक अच्छे ब्लॉग फॉलो करने का अवसर मिला !
मोहब्बत तो मरता नही काश तेरे एहसास में मै जिंदा होता...
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