Sunday, May 27, 2018

ख्याल

मेरी बैचेनियों का आलम न पूछिये जनाब,
गर मेरे दर्द को अल्फ़ाज़ मिल गए तो,
यकीनन! आपको भी मेरे दर्द से इश्क़ हो जाएगा।
                             प्रियंका"श्री"
                             27/5/18

4 comments:

  1. यकीनन!
    बेहतरीन पंक्तियां....

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  2. यकीनन, क्या है ख्वाब ये!
    http://purushottamjeevankalash.blogspot.com/2018/05/blog-post_27.html

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  3. बिन लफ्जों के भी अहसास है
    मौन सभी कह जाय
    जो मौन कह जात है
    अल्फाज नहीं कह पाये

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  4. तेरे एहसास में जीता हूँ
    तेरे एहसास मे मरता हूँ
    मोहब्बत तेरे दर्द से हुई
    तुझे क्या खबर मै कैसे जीता हूँ

    @p&r

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