Tuesday, June 30, 2020

कविता

जिनके लिए उसने दहलीज़ तक नाक ली
देर से पता लगा वो इश्क़ नहीं दिल्लगी थी
दिल लगाने का सहारा थे हम तो बस
उनके निशानें पे तो कोई ओर ही खड़ी थी
जानते है ग़म नहीं होगा देखकर उन्हें मेरीहालत
खून से लथपथ चीरे मेरे दिल पर ही तो
 उन की आशिक़ी खड़ी थी
 समय बिताने का खिलौना थे हम तो
 तय मंज़िलों पर नये रिश्ते की सड़क
 पहले से ही पड़ी थी।
जाते हुये बस दुआ यही कर जाएंगे
रिश्तों की अहमियत भी हो तुझे
आखिर मेरे मरे प्यार की ज़मीनपे
तेरे नये रिश्ते की नींव जो पड़ी थी
 प्रियंका "Meeraant(मीरांत)"
30/6/20

Wednesday, June 24, 2020

शायरी

लोग कहते है वो ज़रा 
चुप सी रहने लगी है
शायद ख़फ़ा है या दर्द से गुज़री है
बातें तो तमाम होने लगी उसके बारे में
होती भी क्यूँ न लब और लफ्ज़ 
भी जो ख़ूब होते है कहने के लिए
बस होता नहीं है तो यहां कोई
इत्मिनान से सुनने वाला।
प्रियंका"Meeraant(मीरांत)"
25/6/20

शायरी

होना तुम्हारा जिंदगी में मेरी,
क्या जानोंगे तुम,
जिंदगी हो मेरी बस इतना जान लो।

गलतियां हुई है मुझसे, तो सज़ा भी हो मुझे
मंजूर नहीं , कटघरे में खड़ा होना तुम्हारा।

दोस्ती करना है तो आँसुयों से करो,
मुस्कुराहटें तो अक्सर साथ छोड़ जाती है।

प्रियंका"Meeraant(मीरांत)"
24/6/20

Saturday, June 20, 2020

मेरे पापा

फौलादी सा सीना रखे
कभी न जो थमते रहते
चलते रहते चलते रहते
वो है देखो पापा मेरे

आसमान की ओर है देखना
जिन्होंने मुझको है सिखलाया
शेर हूँ मैं उनका ,इन्होंने मुझको
 है बतलाया।
डर की आँखों में आँखों को
डाले जो है हरदम रहते
वो है देखो पापा मेरे


जीवन की मुश्किल में रुकना
जिन्होंने मुझको न सिखलाया
नदियों सा कैसा है बहना ,
पर्वत सा कैसे है रहना
उन्होंने मुझको है बतलाया

मुझमे सिमटी उनकी पूरी दुनियां
 यही बस हमेसा कहते रहते
करते कैसे स्वमं की रक्षा
बतलाते है ये पापा मेरे

मेहनत करना, सब्र है धरना
सपनों को कैसे है पूरा करना
टेढ़े-मेढ़े और धूमिल रस्तों पर
बिना रुके कैसे बढ़ते जाना
मेरी प्रेरणा, मेरे साहस
पापा मेरे 
सदा साथ ही रहते

कभी नहीं कहता मैं
सदा चुप ही रहता मैं
बस आज कहूँगा यही बात
पापा मेरे आप हो मेरी सौगात।
प्रियंका"Meearnat(मीरांत)"
20/6/20


शायरी

डरते है अक्सर वही टूटने से उसके,
जिनके रिश्तें कांच के बने होते है
गम तो बस इतना रह गया 
जिन्हें पाया हमनें ,
उनकी चाहत हमें खोने में है।
प्रियंका "Meeraant(मीरांत)
20/6/20

Thursday, June 18, 2020

अवसाद

अक्सर वक़्त नहीं है 
बहुत उलछे हुए है
जिंदगी की उलछनों में,
भूल जाते है बस
उन अपनों को,
जो राह देखते है हमारी
कहने को दिल की हर कहानी,
पर होता कहाँ है वक़्त
सिर्फ सुनने उनके दो लबों को,
ये वक़्त रुकता नहीं 
वो शख्श कहता नहीं,
बस जाती है तन्हाई
कुछ यूँ उसके जीवन में,
साथ होते भी ,साथ उनके
कोई रहता नहीं,
थक जाता है जब वो
ये जान कर ,
कोई नहीं है साथ
उनके हालात पर,
वो चुनाव नहीं करता
खुद की मौत के फ़रमानका
बस लड़ नहीं पता 
जिंदगी के अकेलेपन के डर से
और कर देता जीवन दान 
खुद में खुद से लड़ के,
फिर क्या,
जो है वो है ही यहां,
कुछ वक़्त को ठहरकर 
भी ,जो सोच लेता है 
किसी अपने के अवसाद भरे 
जीवन को हर लेता है,
जिंदगी उस अपने की जी जाती है 
बरना ये दुनियां है बाबू ,
चलती है और चलती ही जाती है।
प्रियंका"Meeraant(मीरांत)"
19/6/20



शायरी

क्या फ़र्क पड़ता है,
सोये कितना है,
मेहरबान होती है 
जिंदगी उन पर
जिन्हें आराम की नींद
बसर होती है,
यहां तो आँखों ने भी
न सोने की ठान रखी है।
प्रियंका"Meeraant(मीरांत)"

Wednesday, June 10, 2020

शौक

गांव में एक आलीशान मकान था उस आलीशान मकान का मालिक बहुत पैसे वाला था और उसके बहुत शौक थे। उसने अपनी जिंदगी के हर एक शौक को पूरा किया था। एक दिन उसे जंगल में घूमने का शौक हुआ । और वो अपने दो नौकरों को लेकर अपने गांव के बाहर के विशाल जंगल में घूमने निकल पड़ा । जंगल में घूमते हुए उसकी नज़र पेड़ पर बैठी एक सुंदर प्यारी सी चिड़िया पर पड़ी। जिसे देखते ही वो मोहित हो गया।
मालिक -इतनी सुंदर चिड़िया। 
           ऐसी चिड़िया मैंने आज तक नहीं देखी। अगर इस      चिड़िया को मैं अपने घर ले जाउ।तो ऐसे सुंदर पक्षी को रखने वाला गांव में मैं ही एक मात्रा व्यक्ति होंगा।
           
 उसके साथ जो दो नौकर थे । 
 उनसे कहा 
 मालिक - जाओ मेरे लिए इस सुंदर सी चिड़िया को पकड़ कर लाओ।
 नौकर -जी हुज़ूर 
 
बोलकर दोनों नौकर चिड़िया को पकड़ने में लग गए।
 चिड़िया ने कई बार कोशिश की पर वो पकड़ी गयी क्योंकि दोनों में से एक पक्षी पकड़ने में माहिर था।
 मालिक बहुत खुश था आखिर वो जीत चुका था। उसके हाथ एक सुंदर चिड़िया जो लग गयी थी और गांव में और भी अमीर लोग थे पर वैसा पक्षी किसी के पास नहीं था।
 
 समय बीतता गया। धीरे-धीरे चिड़िया अपने मालिक से बहुत प्यार करने लगी ,उसकी हर बात मानती । वो चिड़िया को चहकने बोलता चहकती , शांत रहने बोलता शांत रहती। हर तरह से चिड़िया मालिक की हो गयी थी इसलिए पिंजरे में रहकर भी खुश थी।
जब मालिक पिंजरे से निकलाता तो निकल कर भी उड़ती नहीं थी , बल्कि अपने मालिक के चारों ओर उड़ती रहती। ऐसा सालों तक चलता रहा ।चिड़िया मालिक की वफादार थी उसे बहुत प्यार करती थी । इसलिए उसे छोड़ कर कहीं नहीं जाती। 

आखिर मालिक को भी उसकी वफादारी की आदत हो गयी थी , समय के साथ मालिक के और कई शौक के साथ उस चिड़िया को लेकर भी उसका शौक पूरा हो चला था। अब वह पहले जैसे चिड़िया का ख़्याल नहीं रखता , उसके साथ जो घण्टों बिताता था अब उसको समय नहीं देता। उसके खाने पीने का ख़्याल नहीं रखता।
 ये सब देख चिड़िया मायूस रहने लगी। मालिक पहले जैसा उसे अपने हाथों से अब खाना भी नहीं खिलाता था ।इसलिये चिड़िया का खाना भी कम होने लगा । दिन-दिन भर उदास बैठी रहती, न कुछ बोलती, बस पिंजरे में एक कौने में बैठी रहती। अपने मालिक का इंतेज़ार करती कब वो आये उससे बात करे। ऐसे करते हुए कई दिन निकल गए महीने गुजरने लगे। चिड़िया की हालात पर उसके मालिक का ध्यान ही नहीं गया। और मायूस चिड़िया अपने मालिक के प्यार, परवाह की याद में उसी पिंजरे में एक दिन मरी हुई मिली।

Moral of the story- शौक के लिये निर्जीव चीजे है सजीवों को हर वक़्त अपनों के प्यार,अपनेपन के एहसास की जरूरत होती है।
#प्यार #शौक #मायूस

Sunday, June 7, 2020

कोरोना नामक महामारी

आज कमरे में बैठे हुए कमरे की खिड़की से बाहर देखा तो हर कुछ मिनट में मुक्ति वाहन दिखाई दिए और देखते ही मन में बस यही भाव आये कि इस महामारी ने ये तो सीखा दिया कि जिस शरीर को लेकर हम स्वयं में रहते है , अपनी भावनओं के लिए अपनों और दूसरों की भावनायों की कद्र करना भूल जाते है, तकलीफ को समझना भूल जाते है, व्यक्तिवादी प्रवृत्ति से पोषित होते जाते है। अर्थात सामाजिकता से दूर इंसान व्यक्तिगत सोच रखने लगता है और जब ये शरीर ही नहीं होता तब सब खत्म हो जाता है।
अक्सर बुजुर्गों  के सानिध्य में रहने वाले सुनते है दुनिया में ऐसे काम करना जिससे लोग तुम्हे जाने के बाद भी याद कर सके। उनकी बातें,उनके अनुभव  पीढ़ी दर पीढ़ी  सबसे लिए  महत्त्वपूर्ण है । जो हमें भौतिक दुनियां में जीने का तरीका सिखाती है जिससे जीना बहुत आसान और सार्थक हो जाता है। अभी भी वक़्त है क्योंकि उम्मीद नही छोड़नी चाहिए इसलिए कृप्या सिर्फ स्वयं को लेकर न सोचे, हो सकता है आपका शरीर इस बीमारी से लड़ने को तैयार हो पर जरूरी नही सामने वाले का भी हो। अब सबके बारे में सोचने का समय है। मदद करें।
महामारी में जिस तरह परिवार अपनों को खो रहे है । भगवान उनको इस दुःख को सहने की शक्ति दे।
प्रियंका श्री
7।6।20

Friday, June 5, 2020

रिश्तें

रिश्तें जुड़ आसानी जाते है 
मुश्किल उनको निभाना है।
कह देना प्यार है तुमसे
मुश्किल कमियों को अपनाना है
कहने करने के खेल में
दिलों से मत खेलना कभी
टूटने पर आवाज़ तो नही होगी
उसकी,
पर उठेगा जो दर्द ,
मिलेगी नही दवा उसकी,
किस्मत से मिलता है
प्यार वो जो सच्चा होता है
दूर कर देना उसे , 
अच्छी नहीं बात ये होगी
उतार चढ़ाव ही जिंदगी का आधार है
समझ न पाए जो इसे, 
तकलीफ में जिंदगी उसकी ही होगी
गर समझ सको तो समझो मुझे
मेरे बिना जिंदगी अधूरी भी तुम्हारी होगी।
प्रियंका श्री
5।2।20

Monday, June 1, 2020

शायरी

नहीं आएगा अब कोई खत 
तेरे नाम से
न तुझे परेशान करेगा कोई अब
मेरे नाम से
गुजर चुका है जो वक़्त ,अब लौटेगा
नहीं
बस ठहरे मत रहना वही मेरे नाम से।
प्रियंका श्री
130।5।20

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...