गांव में एक आलीशान मकान था उस आलीशान मकान का मालिक बहुत पैसे वाला था और उसके बहुत शौक थे। उसने अपनी जिंदगी के हर एक शौक को पूरा किया था। एक दिन उसे जंगल में घूमने का शौक हुआ । और वो अपने दो नौकरों को लेकर अपने गांव के बाहर के विशाल जंगल में घूमने निकल पड़ा । जंगल में घूमते हुए उसकी नज़र पेड़ पर बैठी एक सुंदर प्यारी सी चिड़िया पर पड़ी। जिसे देखते ही वो मोहित हो गया।
मालिक -इतनी सुंदर चिड़िया।
ऐसी चिड़िया मैंने आज तक नहीं देखी। अगर इस चिड़िया को मैं अपने घर ले जाउ।तो ऐसे सुंदर पक्षी को रखने वाला गांव में मैं ही एक मात्रा व्यक्ति होंगा।
उसके साथ जो दो नौकर थे ।
उनसे कहा
मालिक - जाओ मेरे लिए इस सुंदर सी चिड़िया को पकड़ कर लाओ।
नौकर -जी हुज़ूर
बोलकर दोनों नौकर चिड़िया को पकड़ने में लग गए।
चिड़िया ने कई बार कोशिश की पर वो पकड़ी गयी क्योंकि दोनों में से एक पक्षी पकड़ने में माहिर था।
मालिक बहुत खुश था आखिर वो जीत चुका था। उसके हाथ एक सुंदर चिड़िया जो लग गयी थी और गांव में और भी अमीर लोग थे पर वैसा पक्षी किसी के पास नहीं था।
समय बीतता गया। धीरे-धीरे चिड़िया अपने मालिक से बहुत प्यार करने लगी ,उसकी हर बात मानती । वो चिड़िया को चहकने बोलता चहकती , शांत रहने बोलता शांत रहती। हर तरह से चिड़िया मालिक की हो गयी थी इसलिए पिंजरे में रहकर भी खुश थी।
जब मालिक पिंजरे से निकलाता तो निकल कर भी उड़ती नहीं थी , बल्कि अपने मालिक के चारों ओर उड़ती रहती। ऐसा सालों तक चलता रहा ।चिड़िया मालिक की वफादार थी उसे बहुत प्यार करती थी । इसलिए उसे छोड़ कर कहीं नहीं जाती।
आखिर मालिक को भी उसकी वफादारी की आदत हो गयी थी , समय के साथ मालिक के और कई शौक के साथ उस चिड़िया को लेकर भी उसका शौक पूरा हो चला था। अब वह पहले जैसे चिड़िया का ख़्याल नहीं रखता , उसके साथ जो घण्टों बिताता था अब उसको समय नहीं देता। उसके खाने पीने का ख़्याल नहीं रखता।
ये सब देख चिड़िया मायूस रहने लगी। मालिक पहले जैसा उसे अपने हाथों से अब खाना भी नहीं खिलाता था ।इसलिये चिड़िया का खाना भी कम होने लगा । दिन-दिन भर उदास बैठी रहती, न कुछ बोलती, बस पिंजरे में एक कौने में बैठी रहती। अपने मालिक का इंतेज़ार करती कब वो आये उससे बात करे। ऐसे करते हुए कई दिन निकल गए महीने गुजरने लगे। चिड़िया की हालात पर उसके मालिक का ध्यान ही नहीं गया। और मायूस चिड़िया अपने मालिक के प्यार, परवाह की याद में उसी पिंजरे में एक दिन मरी हुई मिली।
Moral of the story- शौक के लिये निर्जीव चीजे है सजीवों को हर वक़्त अपनों के प्यार,अपनेपन के एहसास की जरूरत होती है।
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