न जाने क्यों?,कैसे ?,चुने थे वो रास्ते,
जिन्हें कहते थे गलत सभी,
वो मासूमियत थी या थी कोई खता ,
जो बढ़ चले थे कदम जहां ,
न जाने क्या कशिश थी वहां,
जो न देख सके काँटों का ज़हान,
चलते चले ,सहते रहे ,गम ए दर्द
जिंदगी का,
मगर न थम सके उन कदमों के निशान,
एहसास ही न हुया की रास्ते गलत थे ,
कदमों के निशान जिनपे चिन्हित हो चले थे,
जब अनुभवों ने अपना जाल बिछाया,
सही गलत का फर्क समझाया,
अचेतन मन मे चेतना का आलोक
जलाया,
सही राह से अवगत कराया,
ये तू ही है जो सदा से मेरे मन मे समाया,
मेरे ईश्वर ने आज मुझे ,
सही मार्गर्दर्शन दिखलाया।
प्रियंका"श्री"
29/8/18
Thursday, August 30, 2018
न जाने क्यों?...
Friday, August 17, 2018
शायरी
कई आशियानें बदलें हमनें तेरी एक तलाश में
अब जब तू मिला है तो दिल को चैन नही है
प्रियंका"श्री"
17/8/18
Tuesday, June 5, 2018
ख़याल
पूछते है हाल सब हमसे,अब उन्हें बताये क्या
मुस्कुरा कर कह देते है ,सब ठीक है,
किसी को अश्क अब अपने दिखाए क्या।
प्रियंका"श्री"
5/6/18
Friday, June 1, 2018
ख्याल
तबाह कर चले है
वो जिंदगी अपनी,
किसी खुदगर्ज़ ,
इंसान के लिए।
दिखा सब कुछ उन्हें ,
न दिख सके तो बस
हम,
थी जिसके दिल में मोहब्बत
सिर्फ और सिर्फ उनके लिए।
प्रियंका"श्री"
2/6/18
Sunday, May 27, 2018
ख्याल
मेरी बैचेनियों का आलम न पूछिये जनाब,
गर मेरे दर्द को अल्फ़ाज़ मिल गए तो,
यकीनन! आपको भी मेरे दर्द से इश्क़ हो जाएगा।
प्रियंका"श्री"
27/5/18
Monday, May 21, 2018
ख्याल
एक बार कह तो दिया होता
कि अब दूर जाना है,
निभता नही अब ये रिश्ता पुराना है।
कसम तुम्हारी, हम बिल्कुल न रोकते
एक लफ्ज़ भी,ये लब न बोलते
खुदसे! एक बार कह कर तो देखते।
शायद! फिर जरूरत न होती तब तुम्हें,
गैरो को अपना राजदार बनाने की,
मेरी मोहब्बत की जग रूसवाई कराने की।
प्रियंका"श्री"
21/5/18
Sunday, May 20, 2018
ख्याल
क्या खेल है ख़ुदा का
सच्ची मोहब्बत से भी नवाजा तो
उन्हें
जिनकी हथेलियों में मोहब्बत की
लाइन खींचना ही भूल गया।
मोहब्बत तो करी थी उसने भी टूट के
ये ख़ुदा! उसका यार क्यों उससे रूठ गया?
रुख़सत जब हुया इस दुनियाँ से
छोड़ उसे तड़पता वो ....क्यों चला गया?
उसकी तड़पन में वो कशिश थी
मानो तरस रही हो धरती
मिलने को अपने आकाश से।
😢😢😢😢😢😢😢
प्रियंका "श्री"
21/5/18
कविता
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...
-
लिखने वालों की भी अजीब दुनियां होती है जहां न दुख ,न खुशी की कमी होती है। खुद से ही जुड़े होते है खुद में ही सिमटे होते है पर जब कलम च...
-
मैंने रिश्तों को बदलते देखा है मजबूरी से नहीं, जरुरतों के अनुरूप ढ़लते देखा है मैंने रिश्तों को बदलते देखा है। पहले गैरों और अपनों में एक...
-
जिंदगी में मुश्किलें कई हो, रास्तों पर अड़चने कई हो, डर कर रुक जाना ये तू नही है डर कर मर जाना ये तू नही है मंजिले दूर सही , चलकर आधे रास्ते ...