Saturday, April 10, 2021

सीख

मासूमियत के साथ काम वही कर सकता है जो अपने काम से प्रेम करता हो। बिना ये सोचे कि काम में सफलता है या मेरा काम किसी को पसंद आएगा या नही । बस मुझे ये करना है क्योंकी इसमे मेरी आत्मा बस्ती है। हम सब के सामने ऐसे कई लोग आते है, उनके काम आते है पर अपने अहंकार में या खुद को कम आँकने के सफर में हम अक्सर उन लोगों से उनके कामों से बहुत कुछ सीखना भूल जाते है।
ऐसे ही एक छोटी सी बच्ची ने अपनी मासूमियत से ये मुझे सिखा दिया जिसे सीखना इस वक़्त मेरे लिए बहुत जरूरी था। 
जिंदगी के इस मोड़ पर जब ख़ुद को हारा हुआ तो नहीं पर सबसे कम जरूर आँकना मैंने शुरू कर दिया था। उस वक़्त ये सीख मुझे जीवन को एक नए तरह से जीने में मदद जरूर करेगी।
फ्लोरिना उम्र में 6 से 10 साल तक की बच्ची सुपर डांसर चैप्टर 4 में आयी और सुपर 12 में सेलेक्ट भी हो गयी। जब जजेस द्वारा उसे चुना गया और मैडल और सर्टिफिकेट दिया गया तब उससे पूछा गया कि आप जानते हो आपके साथ क्या हुआ? आपको दिए इस मैडल और सर्टिफिकेएक मतलब क्या है?
जबाब सिर्फ यही मैंने डांस अच्छा किया इसलिए। क्योंकि उसकी कोई ख़ुद से या कार्यक्रम में चुनने को लेकर थी ही नहीं। उसे तो बस डांस करना था और अपना सौ प्रतिशत देना था।
वही बात म्यूजिक लेजेंडरी ए आर रहमान जी ने भी इंडियन आईडल के कार्यक्रम के दौरान कही कि जब उन्हें ऑस्कर के लिए चुना गया तब उन्हें चिंता इस बात की नहीं थी कि उन्हें ऑस्कर मिलेगा या नहीं बल्कि इस बात की थी कि वे सुर में गा पाएंगें या नहीं।

इन बातों से जाना कि जब हम अपने काम को व्यवसाय में बदल देते है तब उसकी आत्मा को मार देतेहै हमारा कर्तव्य सिर्फ अपने आपको और आपके कौशल को निखारना है न कि आगे बढ़ने की दौड़ में भागना।

जब आप सिर्फ अपने काम से प्यार करते है आपको सिर्फ वही करना है बिना किसी बात की चिंता के तब वह काम आपके लिए हार ,जीत, सम्मान ,अपमान और भी भावनायों से ऊपर उठ जाता है । वह काम सिर्फ आपको ख़ुशी और सुकून देने लगता है।

मुझे लिखना पसंद है पढ़ना पसंद है पर इन सब को मैं हमेशा एक स्ट्रेस के तौर पर लेती हूँ। जबकि इन कामों में मुझे सुकून मिलता है लिखते वक्त हमेशा दिमाग मे आता है मेरा लिखा पसंद आएगा या नहीं?

पर अब सोच ही बदल गयी। अब बस जो मुझे पसंद है वो करना है क्यों कर रही हूँ ये अब मेरे लिए मायने नही रखता। और आपके लिए भी नहीं रखना चाहिए।

बस आप अपना सौ प्रतिशत दीजिये ,पर भार समझ कर नहीं उससे प्यार करके । परिणाम से ज्यादा आपको करने में मज़ा आयेगा।
 मीरांत

Tuesday, March 30, 2021

कविता

बड़ी ही अजीब होती है ख़यालों की दुनियां
वास्तविकता से परे तो आभाषी में भी जीवंत सी
लाखों ख्वाहिशों में लिपटी सी
मन मे अलग उथलपुथल रख दे
बिना बात धकड़नों  के तीव्र वेग सी
आधारों से मुक्त, स्वच्छन्द सी
भटकता मन जब भी मुक्त होकर
निकलन पड़ता है दूर इससे कहीं
उलछनों और मेहनत की इस चार दिवारी में
मानों सुंदर किसी सपनें से दूर होकर
बैठा हो कोई धधकते उस ज्वालामुखी पर
असलियत मानों जहां सामने हो और उड़ने की चाह में
आग में लिपटे उन पंखों को दर्द में भी फड़फड़ाना है
जानते हो जैसे वे पंख जितने ऊपर आसमानों को
छूने को बेचैन होंगे ,उतना आसान होगा फैले उस समुन्दर को
पार पाना ,
डर से भरा मन भी जब ऊंचाइयों से दोस्ती कर लेता है
अटूट संघर्ष को जी कर फिर मिलता है जो उसे जो पाना है~मीरान्त

Sunday, March 7, 2021

कविता

हर शख़्स में 
छिपी है अनगिनत ख्वाहिशें
जिनमें छिपे है हज़ारों शख़्स
जो आज़ाद होकर 
खुले आसमान में तैरना चाहते है
लगा कर पंख ज़मीन पर उड़ना चाहते है
तालाब में खिले गुलाब की तरह धरती की 
उस मोड़ पर खिलना चाहते है
अद्भुत है जो , करना है उन्हें
न जाने कितनी उन सब असम्भव ख्वाहिशों 
को पूरा जिन्हें नही सोच सकता वो शख़्स जो
जीता है दुनियां में दुनियां के नियमों से बंधकर
दिल की बात नकार कर दिमाग को आगे रखकर
जो भागता है हवा के उन थपेड़ो से
उड़ा न ले जाये उन्हें वो उस दिशा में 
जहां उसका मन तन सब शांत हो
जो मन करे वो बात हो
सुकून से जो जी रहा हो
उम्मीदों से भरा शख़्स बंद उस शरीर का नहीं
उस तन का एहसास हो
जिसे जीना भूल गया था वो
ढूढता है जिसे
वो हर शहर ,हर गली, हर मकान उसके पास हो
मीरांत

Thursday, March 4, 2021

कविता

सुबह की अलार्म बन कर 
खुशियों की चाबी सी
हर मर्ज की दवा बनकर
सुने आंगन की हरियाली सी
रहती सबके साथ हमेशा
फिर भी अनजानी सी
वक़्त बहुत है सुनने को
लफ्जो में क्यों कमियों सी
दूसरों के दर्द में मलहम बनकर
अपने दर्द को क्यों छिपाती सी
एक मकान को जो बना देती
जगमग घर की दीवाली भी
भर्ती जो सबका सूनापन
खुद में सुनी वादी सी
लड़की से औरत और
बीवी से मां तक के सफ़र को
निखारती जो वो है प्यारी सी ~मीरांत

Friday, February 26, 2021

कविता

भटक गए है कुछ रास्ते मेरे
तलाश ज़ारी है इस घनी आबादी में
हर तरफ जहां दिखता है अंधेरा मुझे
फूटती है रोशनी की किरण उस चारदीवारी में
आसान नहीं होता भूल जाना किसी को
फिर चाहे दुनियां बना क्यों न ले 
वक़्त को मलहम
आता नहीं बिता वक़्त यहां ,जहां रहते है लोग
अपनी होशियारी में
तजुर्बा बहुत हो चुका है इस दुनियादारी का मुझे
तभी रहते दूर है हम अब कीमतों के बाजारों में
यकीन बस इतना है कि मिलना लिखा है मेरा
उससे
चुना है जिसे किस्मत के कारीगरों ने।।
                                मीरांत

शायरी

बुलंद आवाज़ों को भी दुनियां ने जहाँ नज़र अंदाज़ कर दिया
हमने तो वहाँ उसकी खामोशी में छिपे शोर को भी सुन लिया।
                                       मीरांत

Saturday, October 31, 2020

कदमों के निशान

जिंदगी में मुश्किलें कई हो,
रास्तों पर अड़चने कई हो,
डर कर रुक जाना ये तू नही है
डर कर मर जाना ये तू नही है
मंजिले दूर सही , चलकर आधे रास्ते
टूट जाना ये तू नहीं है
माना साथ नही है कोई तेरे
तो अकेले चलने में डर कैसा
कदम बढ़ा कर चलता तो जा
होगा पीछे एक दिन काफ़िला खड़ा
तोड़ना क्यों है उम्मीदों को
आस ही तो जिंदा रखेंगी
शर्त यही रख खुद से गर
रखी दूजी से तो दर्द देंगी
टकराकर बापिस आना लहरों का
ये उनकी कमज़ोरी नहीं
देख इस तरफ भी तो
बापिस जाकर आना ही तो ताक़त भली
विश्वास की डोर थाम कर
निकल पड़ अब तू भी
खड़े खड़े नही बनते है दोस्त मेरे
पैरों के निशान कभी।
चल बढ़ बढ़ता चल
इस वक़्त को भी तो कह दे अभी
थाम इसकी छड़ी,
भाग जितना भागना है 
न रुकेगा अब ये प्रयास कभी
बदलना होगा अब तुझको भी
ढलना होगा अब तुझको भी
चल बढ़ बढ़ता चला
न रुकना न थमना कभी
मीरांत
1/11/20

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...