गैरों के लबों पर जब सज जाती है बातें हमारी
यक़ीन मानिये जिंदगी में जिंदा होने का सबब बन जाती है
प्रियंका"श्री"
5/4/18
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कविता
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वाह वाह क्या खूब लिखा है प्रियंका जी,
ReplyDeleteएक शेर अर्ज करता हूँ ।
इतना गुरूर खुद पे मत किया कर,ऐ!जिंदगी,
हम मुहब्बत करते हैं गुलामी नहीं : नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
Http://www.NKUtkarsh.blogspot.com
Bahut khoob sir.shukriya naveen ji
ReplyDeleteBahut khoob sir.shukriya naveen ji
ReplyDeleteबहुत खूब
ReplyDeleteबहुत खूब प्रियंका जी -- सस्नेह --
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