Wednesday, April 4, 2018

शायरी

गैरों के लबों पर जब सज जाती है बातें हमारी
यक़ीन मानिये जिंदगी में जिंदा होने का सबब बन जाती है
                                             प्रियंका"श्री"
                                             5/4/18

5 comments:

  1. वाह वाह क्या खूब लिखा है प्रियंका जी,

    एक शेर अर्ज करता हूँ ।

    इतना गुरूर खुद पे मत किया कर,ऐ!जिंदगी,
    हम मुहब्बत करते हैं गुलामी नहीं : नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
    Http://www.NKUtkarsh.blogspot.com

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  2. बहुत खूब प्रियंका जी -- सस्नेह --

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कविता

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