आज फिर मन डगमगाने लगा
अपनी राह से भटकने लगा
बार बार यही विचार लाने लगा
क्या चुना गया रास्ता मेरा
सही है?
गर है तो
मन इतने सवालों से क्यूँ बंधा।
कैसे इस
विचलित मन को शांत करूँ
इसके अंदर चलते
अनगिनत भावो को नियंत्रित करूँ
रास्तों को मंज़िलों में
कैसे तब्दील करूँ
कोई तो बतला दे मुझे
कैसे जीवन को अपने लक्ष्य से पूर्ण करूँ।
~प्रियंका"श्री"
31/12/17