मेरी बैचेनियों का आलम न पूछिये जनाब,
गर मेरे दर्द को अल्फ़ाज़ मिल गए तो,
यकीनन! आपको भी मेरे दर्द से इश्क़ हो जाएगा।
प्रियंका"श्री"
27/5/18
Sunday, May 27, 2018
ख्याल
Monday, May 21, 2018
ख्याल
एक बार कह तो दिया होता
कि अब दूर जाना है,
निभता नही अब ये रिश्ता पुराना है।
कसम तुम्हारी, हम बिल्कुल न रोकते
एक लफ्ज़ भी,ये लब न बोलते
खुदसे! एक बार कह कर तो देखते।
शायद! फिर जरूरत न होती तब तुम्हें,
गैरो को अपना राजदार बनाने की,
मेरी मोहब्बत की जग रूसवाई कराने की।
प्रियंका"श्री"
21/5/18
Sunday, May 20, 2018
ख्याल
क्या खेल है ख़ुदा का
सच्ची मोहब्बत से भी नवाजा तो
उन्हें
जिनकी हथेलियों में मोहब्बत की
लाइन खींचना ही भूल गया।
मोहब्बत तो करी थी उसने भी टूट के
ये ख़ुदा! उसका यार क्यों उससे रूठ गया?
रुख़सत जब हुया इस दुनियाँ से
छोड़ उसे तड़पता वो ....क्यों चला गया?
उसकी तड़पन में वो कशिश थी
मानो तरस रही हो धरती
मिलने को अपने आकाश से।
😢😢😢😢😢😢😢
प्रियंका "श्री"
21/5/18
Saturday, May 19, 2018
ख्याल
अक्सर,
लिखकर छोड़ देती हूँ
नाम उसका
कागज के एक टुकड़े पे
इस ख्याल से
कि
शायद वो मेरी खामोशियों को पढ़ ले.....
प्रियंका श्री
19/5/18
Wednesday, May 16, 2018
ख्याल
उजड़ा हुया था कुछ अंदर मेरे
लाख कोशिशों के भी
जब समझ न आया।
पिछले वक़्त ने तब दस्तक दी
मेरे दिलों दिमाग पर ,
तब बंजर हो चुके रिश्ते की
उजड़ी ज़मीन का ख्याल आया।
जिसे वक़्त-दर-वक़्त सींचने की कोशिश में हमनें, अपना सबकुछ था ,दाव पर लगाया।
ये उसी तकलीफ का एहसास है,
जो मैंने अपने अंदर ,कुछ उजड़ा हुया है पाया।
प्रियंका "श्री"
27/3/18
Wednesday, May 9, 2018
शायरी
बस ! तलाश है उसकी,
प्रियंका"श्री"
9/5/18
Tuesday, May 1, 2018
मकान
वो ईट पत्थरों से बने हुए मकान
वो बनकर बेजान पड़े हुए है मकान
दिखने में जो आलीशान है मगर
रूह से जुदा हुए वो मकान
कितने मायूस दिखते है वो
अंदर से जो तबाह हुए मकान
ज़मीन से जुड़े हुए है जो मगर
फिर भी वीरान पड़े हुए मकान
उनसे अच्छे तो परिंदों के वो घर होते है
जो कच्चे होते है मगर प्यार में बसे होते है
~प्रियंका"श्री"
2/5/18
कविता
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लिखने वालों की भी अजीब दुनियां होती है जहां न दुख ,न खुशी की कमी होती है। खुद से ही जुड़े होते है खुद में ही सिमटे होते है पर जब कलम च...
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मैंने रिश्तों को बदलते देखा है मजबूरी से नहीं, जरुरतों के अनुरूप ढ़लते देखा है मैंने रिश्तों को बदलते देखा है। पहले गैरों और अपनों में एक...
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जिंदगी में मुश्किलें कई हो, रास्तों पर अड़चने कई हो, डर कर रुक जाना ये तू नही है डर कर मर जाना ये तू नही है मंजिले दूर सही , चलकर आधे रास्ते ...