जब भी तू निकले करीब से मेरे, नज़रों से तेरे चेहरे का सज़दा करूँ।
खुद को रोक सकूँ ,अब ये मुनासिब नहीं
तेरे इश्क़ में खुद को अब ऐसे फ़ना करूँ।
प्रियंका "श्री"
29/3/18
दोस्त याद न करें ,तो एक उम्र अधूरी सी लगती है
जिंदगी अपनी तो है मगर ,खफ़ा खफ़ा सी लगती है
शुभरात्रि
प्रियंका श्री
27/3/18
आसान नहीं था,
पंख फैलाकर उड़ना यहाँ।
पर आसमान भी तो,
किसी के हिस्से का नहीं था।
गर गूँजती आवाज़ों में बंध जाते
तो आज शायद
अपना आसमान तक नहीं पा पाते।
मंजूर नही था जो हमें, इसलिए तो
फैला लिए पंख अपने,
और कर लिया पूरा आसमान,
जो कभी मेरे हिस्से ,
में ही नहीं था
प्रियंकाश्री
16/3/18
चाँद की चांदनी से चुराकर ,ख्वाब एक लाया था।
जिसे मैंने अपने जिस्म के ,किसी हिस्से में छुपाया था।
तबदील कर दिया था ,उस ख्वाब को मैंने हकीकत में,
जब ख्वाव ने मुझे, रातों को जागना सिखाया था।
प्रियंका "श्री"
8/3/17
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की उन सभी महिलाओं को बहुत बहुत शुभकामनाएं ।
जिन्होंने सिर्फ इस एक दिन के लिए खुद को महिला होने से गौरवान्वित नही किया ।जो हर पल अपने लिए,अपनों के लिये , इस समाज के लिए कुछ ऐसा कर रही है। जिससे उनको एक नारी होने में सम्मान महसूस हो रहा है। और जो कुछ नही कर रही।
उनसे भी गुज़ारिश है मेरी-
जब आयी है धरा पे तू
एक अलग पहचान लेकर
तो क्यों भूल चली है तू
अपने अस्तित्व को।
समान नही है तू किसी के
न किसी से तुच्छ है
तेरे हाथों में वो कला
जो हर किसी से भिन्न है
गजब की है आत्मा तेरी
गजब का तेरा विश्वास है
जगाना है खुदको तुझे
ये न किसी का काज है
जान लेगी जिस दिन ये तू
तेरी भी अलग एक पहचान है
उस दिन से लेकर हर दिन में
महिला दिवस में जान है।
प्रियंका "श्री"
8/3/18
एक हसीन पल था,
जिसे उस वक़्त से,
चुराया था मैंने,
जिस वक्त ने ,
जीना सिखाया था मुझे।
उस वक़्त के,
न जाने कितनें पलों को ,
समेट कर रखा था
मैंने , कुछ इस तरह,
मानो ,उन चित्रों को अपने ह्रदय
में चित्रित कर रखा हो मैंने।
जब-जब वो चित्र मेरी,
आंखों के समझ आते थे,
दिल में खुशी,
आंखों में नमी दे जाते थे,
वो हर पल अनमोल था,
मेरे लिए ,जो मुझे सदा,
मेरा अपना गुजरा हुया,
कल दिखलाते थे।
उन पलों को जिया था मैंने,
उन पलों से सीखा था मैंने,
मेरे आने वाले कल का आधार
थे ,वो पल
इसलिए मुझे बहुत खास थे, वो पल।
प्रियंका "श्री"
7/3/18
भावसमुद्र के बीचों बीच
बसा था मकान मेरा,
जो ऊंची-ऊंची लहरों में,
कभी ऊंचा उठता,
कभी नीचा होता।
संभाल रखा था।मैंने उसे ,
उन भावों से भरे
सागर की लहरों से,
आखिर अंदर
जो बसा था जहान मेरा।
~प्रियंका श्री
7/3/18
जिंदगी में जब हारने लगो,
तो ,
कुछ वक्त रुकना और सोचना,
क्या ?
यही सोच था तुमने।
गर जबाब "ना" में आये,
तो,
उठना ,
और उन जगहों पर जाना ,
जहाँ हर दिन,हर पल ,
वो लड़ते है अपनी जिंदगी को,
खुशनुमा बनाने में।
~प्रियंका"श्री"
7/3/18
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...