Thursday, March 29, 2018

शायरी

बार-बार ये ख़ता करूँ, हर बार ये ख़ता करूँ
जब भी तू निकले करीब से मेरे,  नज़रों से तेरे चेहरे का सज़दा करूँ।
खुद को रोक सकूँ ,अब ये मुनासिब नहीं
तेरे इश्क़ में खुद को अब ऐसे फ़ना करूँ।
                                     प्रियंका "श्री"
                                     29/3/18
     

Tuesday, March 27, 2018

शायरी

दोस्त याद न करें ,तो एक उम्र अधूरी सी लगती है
जिंदगी अपनी तो है मगर ,खफ़ा खफ़ा सी लगती है
        शुभरात्रि
                                                      प्रियंका श्री
                                                      27/3/18

Monday, March 26, 2018

ख़्याल

आसान नहीं था,
पंख फैलाकर उड़ना यहाँ।

पर आसमान भी तो,
किसी के हिस्से का नहीं था।

गर गूँजती आवाज़ों में बंध जाते
तो आज शायद
अपना आसमान तक नहीं पा पाते।

मंजूर नही था जो हमें, इसलिए तो
फैला लिए पंख अपने,

और कर लिया पूरा आसमान,
जो कभी मेरे हिस्से ,
में ही नहीं था
                             प्रियंकाश्री
                             16/3/18

Thursday, March 22, 2018

गलतफहमीयां

गलतफहमीयों की दीवारों को
इतना मजबूत मत करो।
जब ये गलतफहमीयां दूर होगीं,
तब सिर्फ ये दीवारें रह जायेंगी,
जिन्हें चाह कर भी,
फिर कोई दूर नहीं कर पायेगा।
ये रिश्तों के बीच कब बढ़ जायेगी,
आभास भी तुझे इसका नहीं लग पायेगा।
तब ये ख़ुदा के बंदे तेरे पास
बस पछताने को ही रह जायेगा।
गर है थोड़ी सी भी खुदाई तुझमें,
तो अपनों को आज अपना बना ले।
गैर गर हो गए अपने तो ,
अपना बनाने का फिर तुझे,
वक़्त भी नहीं मिल पायेगा।
                             ~प्रियंका"श्री"
                                22/3/18

Thursday, March 8, 2018

ख्याल

चाँद की चांदनी से चुराकर ,ख्वाब एक लाया था।
जिसे मैंने अपने जिस्म के ,किसी हिस्से में छुपाया था।
तबदील कर दिया था ,उस ख्वाब को मैंने हकीकत में,
जब ख्वाव ने मुझे, रातों को जागना सिखाया था।
                                             प्रियंका "श्री"
                                             8/3/17

Wednesday, March 7, 2018

महिला दिवस

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की उन सभी महिलाओं को बहुत बहुत शुभकामनाएं ।
जिन्होंने सिर्फ इस एक दिन के लिए खुद को महिला होने से गौरवान्वित नही किया ।जो हर पल अपने लिए,अपनों के लिये , इस समाज के लिए कुछ ऐसा कर रही है। जिससे उनको एक नारी होने में सम्मान महसूस हो रहा है। और जो कुछ नही कर रही।
उनसे भी गुज़ारिश है मेरी-

जब आयी है धरा पे तू
एक अलग पहचान लेकर
तो क्यों भूल चली है तू
अपने अस्तित्व को।

समान नही है तू किसी के
न किसी से तुच्छ है
तेरे हाथों में वो कला
जो हर किसी से भिन्न है

गजब की है आत्मा तेरी
गजब का तेरा विश्वास है
जगाना है खुदको तुझे
ये न किसी का काज है

जान लेगी जिस दिन ये तू
तेरी भी अलग एक पहचान है
उस दिन से लेकर हर दिन में
महिला दिवस में जान है।
                       प्रियंका "श्री"
                        8/3/18

गुजरे पल

एक हसीन पल था,
जिसे उस वक़्त से,
चुराया था मैंने,
जिस वक्त ने ,
जीना सिखाया था मुझे।

उस वक़्त के,
न जाने कितनें पलों को ,
समेट कर रखा था
मैंने , कुछ इस तरह,
मानो ,उन चित्रों को अपने ह्रदय
में चित्रित कर रखा हो मैंने।
 
जब-जब वो चित्र मेरी,
आंखों के समझ आते थे,
दिल में खुशी,
आंखों में नमी दे जाते थे,
वो हर पल अनमोल था,
मेरे लिए ,जो मुझे सदा,
मेरा अपना गुजरा हुया,
कल दिखलाते थे।

उन पलों को जिया था मैंने,
उन पलों से सीखा था मैंने,
मेरे आने वाले कल का आधार
थे ,वो पल
इसलिए मुझे बहुत खास थे, वो पल।
                  प्रियंका "श्री"
                  7/3/18

        

विचार

भावसमुद्र के बीचों बीच
बसा था मकान मेरा,
जो ऊंची-ऊंची लहरों में,
कभी ऊंचा उठता,
कभी नीचा होता।
संभाल रखा था।मैंने उसे ,
उन भावों से भरे
सागर की लहरों से,
आखिर अंदर
जो बसा था जहान मेरा।
                      ~प्रियंका श्री
                         7/3/18

विचार

जिंदगी में जब हारने लगो,
तो ,
कुछ वक्त रुकना और सोचना,
क्या ?
यही सोच था तुमने।

गर जबाब "ना" में आये,
तो,
उठना ,
और उन जगहों पर जाना ,
जहाँ हर दिन,हर पल ,
वो लड़ते है अपनी जिंदगी को,
खुशनुमा बनाने में।
              ~प्रियंका"श्री"
                 7/3/18

Thursday, March 1, 2018

होली की शुभकामनाएं

ब्लॉग पर उपस्थित व अन्य सभी मित्रों को होली की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं....

होली

        
रंग हरा गुलाबी नीला पीला
बिखरा है आसमानों में
झूम उठा है हर का मन
होली के त्यौहारों में
हर दिशा में फैला है
अद्भुत सा एक शोर
लोग थिरक रहे है देखो
होली के मनभावन गानों में
बूढ़ो बच्चों जवानों में
छाया है कितना जोश
दौड़ रहे है देखो कैसे
ये सड़को बाजारों में
धूम मचाओ नाचो गाओ
अपनों परायों में
पर न करना आहत
किसी के मन को
कहकर -"होली है"
ऐसी बातों में।
                           ~प्रियंका"श्री"
                              2/4/18

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...