किताबों से रिश्ता,लफ्जों से मोहब्बत
24/4/18
किताबों से रिश्ता मेरा ,उतना पुराना है,
जितनी पुरानी है ,उसके पन्नो में रखे हुए
फूलों की खुशबू,
जितना पुराना मुरझाया गहरे रंग का वो फूल,
जिसका अक़्स आज भी
मेरी किताब के पन्ने पर छपा हुया है
जितनी पुरानी है मोहब्बत मेरी
जितनी पुरानी है इबादत मेरी,
मेरे ख़ुदा के लिए,
जितनी पुरानी है वो शायरी,
जो आज तक भूली नहीं गयी,
ये रिश्ता मेरा ,मेरी किताबों से ,
मेरी पहली इज़हारे मोहब्बत है।
प्रियंका"श्री"
24/4/18
ये तो उस ख़ुदा की खुदाई ठहरी ,
मेरी मोहब्बत की सच्चाई ठहरी,
जो ख़ुदा ने हम पर यूँ रहम किया।
वरना वो तो आफ़ताब ठहरा,
उसे छूने का हममें कहा दम था।
प्रियंका"श्री"
24/4/18
क्या तरीका सोचा है लड़कियों से छुटकारे का।
पहले गर्भ में मार देते थे,पर उस वक़्त मेरे अजन्मे शरीर के टुकड़े ,अपने ही करते थे या करवाते थे ।
तब भी मैं तड़पती थी।
बस उस वक़्त मेरी पीड़ा,मेरा छिन्न भिन्न शरीर किसी को दिखता नही था।
अब जब बाहर आ भी जाती हूँ तो
मेरे जिस्म को नोच नोच कर, मेरे सपनो को
मेरी चीखों के साथ खत्म अब भी तो वो कर देते है जिन्हें मैं या तो जानती नही या जो मुझे अपना मानते नही।
बस अब मेरा घायल जिस्म सबके सामने रहता है मेरी जरूरत हैवानियत के लिए ही क्यों है इस धरती पर ? क्या मुझे इंसान नही माना जा सकता?😢😢😢😢😢😢
एक लड़की
गैरों की बस्ती में
हमने भी अपना मकान खरीदा।
इस ख़्वाहिश में,
कि गैरों को हम अपना बना ही लेंगे।
देखो आज,
मकान भी टूट गया,
बस्ती भी छूट गयी।
गैर-गैर ही रहे,
बस हम समझदार हो गए।
प्रियंका"श्री"
27/3/18
ये तो उस ख़ुदा की खुदाई ठहरी
जो उसने हम पर यूँ रहम किया
वरना वो तो आफ़ताब ठहरा
उसे छूने का हममें कहा दम था।
प्रियंका"श्री"
13/4/18
सद्गुरु दे हमकों गुरुवाणी
हम भी बैठे सुनते हैं
ज्ञान कहाँ से आये हृदय में
जब हृदय में अवगुण बसते हैं
न सार्थ हो गुरुवाणी का
न सार्थ हो ऐसे सत्संग का
जहां बैठ सुनता हर कोई
अमल नहीं पर करते हैं
प्रियंका"श्री"
11/4/18
गैरों के लबों पर जब सज जाती है बातें हमारी
यक़ीन मानिये जिंदगी में जिंदा होने का सबब बन जाती है
प्रियंका"श्री"
5/4/18
मेरे खव्वों की दुनियाँ छोटी नहीं थी,
कर गुजरने का हौसला भी असीम था,
कमी बस यही रह गयी थी कि,
हाँथो में मेरी जिंदगी की
लकीर छोटी बस गयी थी।
फिर भी एक सुकून रहेगा मुझे
जो कुछ कर गुजर गए
क्या खूब कर गुजर गए
छोटी सी जिंदगी में ही अपना
नाम कर गए।
प्रियंका "श्री"
1/4/18
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...